TKDL भारत का डिजिटल शील्ड: पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा TKDL भारत का डिजिटल शील्डः पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा कैसे की गई [विज्ञापन प्लेसमेंट: यहाँ अपना Ad Code डालें] समस्या क्या थीः पश्चिमी पेटेंट अधिकारी संस्कृत/तामिल/फारसी नहीं पढ़ सकते थे अंतरराष्ट्रीय पेटेंट व्यवस्था का एक मूलभूत नियम है: पेटेंट केवल उसी आविष्कार को प्रदान किया जा सकता है जो 'नया' हो और जिसका पूर्व में साहित्य या सार्वजनिक डोमेन में कोई उल्लेख (Prior Art) न हो। मुख्य समस्या यह थी कि USPTO (अमेरिका) या EPO (यूरोप) के पेटेंट परीक्षक 'प्रायर आर्ट' खोजने के लिए केवल पश्चिमी भाषाओं और उनके अपने डिजिटल डेटाबेस का उपयोग करते थे। उनके पास महर्षि चरक, सुश्रुत, वाग्भट के ग्रंथों या तमिल के प्राचीन सिद्ध साहित्यों को पढ़ने, समझने या खोजने की कोई क्षमता नहीं थी। इस भाषाई अवरोध (Language Barrier) का अनुचित लाभ उठाकर विदेशी कंपनियाँ आसानी से भारतीय जड़ी-बूटियों पर पेटेंट हासिल कर रही थीं, क्योंकि परीक्षकों के पास यह प्रमाणित करने का कोई ...